Sunday, September 19, 2010

Bhakti - भक्ति

भक्ति व्यक्तिगत समर्पण है, भक्ति भावना का उत्क्रिस्ट स्वरुप है | इश्वर तक जाने के लिए भक्ति भाव का होना आवश्यक है जिसमे निःस्वार्थ समर्पण की आवश्यकता होती है | इश्वर के करीब पहुचने के लिए जमघट, तामझाम और शोर - शराबे  की आवश्यकता नहीं होती |   

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