Monday, April 27, 2020

What is failure?


What is failure?

Failure is a step of success.
The experiment which get failed, it is successful experiment as my thinking,
because
it gives you to explore new ideas,
it proves that there is some other way to explore to accomplish it.,
it gives you to make more experimental,
and so it is first step of success.

Sunday, April 26, 2020

ना कोई देवी देवता न प्रभु न अल्लाह काम आया।

संदेश...
ना कोई देवी देवता न प्रभु न अल्लाह काम आया।
ना कोई झाड़-फूक बाबा, साधु-महात्मा काम आया।
न कोई पंडित-पुजारी, न मौलवी-पादरी काम आया।
फरिस्ता के रूप में डॉक्टर नर्स व कंपाउंडर काम आया
न कोई धर्म न कोई धार्मिक स्थल काम आया।
सिर्फ अस्पताल व उसके साजो सामान काम आया।
न दवा काम आयी, न विज्ञान काम आया
सिर्फ संयम, सेवा, छुप कर रहना काम आया।
धूल गई कलई, खुल गई पाखंड-पाखंडियों की चाल।
सबको सबक सीखा रहा, कोरोना की मारक चाल।
                    ---प्रमोद आनंद 02.04.2020

CoViD-19 do and not to do

CoViD-19 essentials to do and don't

**Be a true Indian. Show compassion, Be considerate,Help those in need. We will get through this! 

**Help out the elderly by bringing them their groceries and other essentials. 

**Avoid going out during the lockdown. Help break the chain of spread. 

**Your essential needs will be taken care of by the government in a timely manner. Please do not hoard. 

**If you have symptoms and suspect you have coronavirus - reach out to your doctor or call state helplines. 📞 Get help. 

**Call up your loved ones during the lockdown, support each other through these times. 

**Don't hoard groceries and essentials. Please ensure that people who are in need don't face a shortage because of you! 

**The virus does not discriminate. Why do you? DO NOT DISCRIMINATE. We are all Indians! 

**Be considerate. While buying essentials remember that you need to share with 130 crore fellow citizens! 

**This will pass too. Enjoy your time at home and spend quality time with your family! Things will be normal soon.

**Be compassionate! Help those in need like the elderly and poor. They are facing a crisis which we can't even imagine! 

**Panic mode : OFF! ❌ ESSENTIALS ARE ON! ✔️ 

**Help the medical fraternity by staying at home.

**Lockdown means LOCKDOWN! Avoid going out unless absolutely necessary. Stay safe! 

**Stand against FAKE news and illegit WhatsApp forwards! Do NOT ❌ forward a message until you verify the content it contains. 

**Plan and calculate your essential needs for the next three weeks.

**Plan ahead! Take a minute and check how much supplies you have at home. Planning lets you buy exactly what you need. 

**Help out your employees and domestic workers by not cutting their salaries. Show the true Indian spirit! 

**Going out to buy essentials? Social Distancing is KEY! Maintain at least 2 metres distance between each other in the line. 

**Wash your hands with soap and water often, especially after a grociery run. Keep the virus at bay.

**If you have any medical queries, reach out to your state helpline, district administration or trusted doctors! 

**Get in touch with your local NGO's and district administration to volunteer for this cause. 

**There is no evidence that hot weather will stop the virus! You can! Stay home, stay safe. 

**Our brothers from the North-East are just as Indian as you! Help everyone during this crisis.

पराभक्ति की स्थिति

पराभक्ति की परिभाषा को संत श्री सुंदर दास जी की वाणी से समझने का प्रयास किया..

श्रवण बिना धुनि सुनै, नयन बिनु रूप निहारै।
रसना बिन उच्चरै, प्रसंशा बहु विस्तारै।
नृत्य चरण बिनु करै, हस्त बिनु ताल बजावै।
अंग बिना मिली संग बहुत आनंद बढ़ावै।।
बिनु शीश नावै जहं सेव्य को सेवक भाव लिये रहै।
मिलि परमातम सों आतमा, परा भक्ति सुंदर कहै।

 ये वाणी संत श्री सुंदर दास जी महाराज की है।

यहाँ बहुत ही सार गर्भित बात स्पष्ट की गई है कि

"श्रवण बिन धुनि सुनै", अर्थात हमारे कान जो बाहरी आवाजों  के सुनने की क्षमता रखती है उससे उलट उससे अंतर व भीतर के ध्वनियों को सुनने के लिए सक्षम बनाईये। जिससे विभिन्न प्रकार के राग रागिनियों के धुन बिन वाद्य यंत्रों को सुन सकेंगे और आनन्द से आह्लादित हो सकेंगे। कहने का अर्थ है अंतस्थ होइए।

"नयन बिन रूप निहारे" कहने का अर्थ है आप आँख बंद कर अपने ईष्ट का या इस ब्रह्मांड के विभिन्न आयामों को देखिए, बाह्य दृष्टि को अंतर्दृष्टि में परिवर्तित कीजिए, अंतर्मुखी हो जाइए।

"रसना बिन उच्चरै, प्रसंशा बहु विस्तारै", कहने का अर्थ है विणा जिह्वा के ही संवाद स्थापित हो रही है व बहुत ही बिस्तार से प्रशंशा की जा रही है, अर्थात आप जिह्वा से ना बोल अपने अंतर्मन से ही मष्तिष्क में ही अपने इष्ट की प्रशंसा अर्थात नाम का सुमिरन कर रहें है उनके रूप को अंतर में ही निहार निहार बखान कर निहाल हो रहें है।

"नृत्य चरण बिनु करै, हस्त बिनु ताल बजावै" अर्थात आपके शरीर का अंग पैर और हाथ स्थिर किये हैं और आप नाच रहे है और ताली भी बजा रहें है मतलब आप हाथ पांव समेट कर ध्यान में बैठें है और आनंद से लबालब हो आपका सूक्ष्म शरीर नाच नाच कर ताली बजा बजा कर इष्ट संकीर्तन में शामिल है। अंतर में ही उर्ध्वगामी हो रहें हैं।

"अंग बिना मिली संग बहुत आनंद बढ़ावै" कहने का अर्थ है यह स्थूल शरीर का कोई काम नहीं, इस स्थूल शरीर के बिना ही सूक्ष्म शरीर से अपनेने इष्ट से मिल रहे है व आनंदित हो रहें है।

"बिनु शीश नावै जहं सेव्य को सेवक भाव लिये रहै" कहने का अर्थ है आपने भाव से ही प्रणाम किये दंडवत किये शरीर का अंग सिर झुकाने का कोई मायने नहीं मतलब ध्यान में सिर हिलाने व झुकाने का नहीं सिर्फ इष्ट व सेवक का भाव रखिए अपने अंतस में, अपने मन में, सजग रह कर, सहज भाव से , चेतना जगाये रहिये अपने इष्ट के प्रति।

"मिलि परमातम सों आतमा, परा भक्ति सुंदर कहै" यह इस वाणी का सार है इसका मतलब है ऊपर की भांति जब भक्ति करेंगें तो अपनी आत्मा परमात्मा से मिली रहेगी, इसी भक्ति का नाम परा भक्ति है। आत्मा को परमात्मा से मिलाने का यही एक रास्ता है। ध्यानस्थ हो कर अंतर्मुखी हो अंतस्थ होइए। बाहर की भक्ति से कुछ भी हासिल नही होगा। परा भक्ति ही एकमात्र साधन है परमात्मा से मिलने का। यही संत श्री सुंदर दास जी इस वाणी के माध्यम से हम जीव को बता रहें हैं।
      --- आनंद प्रमोद 20.04.2020

पंच तत्व का मिलन है सौंदर्य प्रकृति का

पंच तत्व का मिलन है सौंदर्य प्रकृति का

आज की सुबह खुशनुमा हुआ।
पंच तत्व का समावेशन हुआ।
आकाश घनघोर घटा से शोभित।
अग्नि पथ विद्युत से अवलोकित।
वायु दे रहा पथ घनघोर घटा को।
जल बूंद तृप्त कर रहा धरणी को।
पृथ्वी धारण किये इस सौन्दर्य को।
अद्भुत संगम देख पंच तत्व का।
तन मन हर्षित हुआ जन जन का।
गर्जन तर्जन करे घन मंडल।
छल छल छलके नीर निर्मल।
देख प्रकृति का सौंदर्य अद्भुत।
आह्लादित आनंद मन हुआ आनंदित।
          ----आनंद प्रमोद 21.04.2020

हम हैं ईश्वरीय अंश...

कवि व संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसी दास जी का कथन है कि

"ईश्वर अंश जीव अविनाशी,
चेतन अमल सहज सुख राशि।"

अर्थात यह जीव माने हम जीव का नाश नहीं होता, क्योंकि हम जीव ईश्वर के अंश है। ईश्वर के अंश होने के कारण हम परम आनंद को पाने के अधिकारी हैं, अपनी चेतना को उस दिव्य स्तर तक पहुंचने के अधिकारी हम हीं हैं वहां तो  विशुद्ध प्रेम, सुख, ज्ञान, शक्ति, पवित्रता और शांति है, उसी विशिष्ट गुण से हम परिपूर्ण हो जातें है। तब सम्पूर्ण प्रकृति भी हमारे लिये सुखदायी हो जाती है। इस स्थिति को केवल अनुभव किया जा सकता है यह स्थूल नहीं है अति सूक्ष्म है परम की अनुभूति अंतर को अंतस को अनंत सुख से ओतप्रोत कर देती है।

पर इस परम स्थिति तक ले जाने के लिए एक देहधारी सद्गुरु की आवश्यकता होती है क्योंकि कहा है "बिन गुरु होहिं ना ज्ञान" फिर तो परम तक ले जाने वाला कोई सदगुरु ही हो सकता है। सद्गुरु सम भाव से उस सच्चिदानंद की शरण में जाने की विधि वही सिखाते हैं। हम देह नहीं हैं, देही हैं, जिसे शास्त्रों में जीव कहते हैं। जीव परमात्मा का अंश है, उसके लक्षण भी वही हैं जो परमात्मा के हैं। वह भी शाश्वत, चेतन तथा आनन्दस्वरूप है। सद्गुरु और ईश्वर को भूलें नहीं ...सद्गुरु के बताए मार्ग पर चल कर ईश्वरीय सुख के अधिकारी बनें।

🙏🌹जय गुरु महाराज🌹🙏

Careing

Careing...
Thoughts of the day..
Careing of some ones means
you are loving him and also you are trying to change him and his environment of living around yourself.