Wednesday, September 30, 2009

मुक्त कर जाओ

दिल चाहता है ,
तुझे छू लूँ,
तुझे पा लूँ,
तुझे देख लूँ,
तुझे समझ लूँ,
पर ये सब कुछ क्यूँ नहीं होता।
तुम तो हो परमआत्मा
निकट सब के रहते हो
पर दूर दूर ही लगते हो।
कभी सपनों में आ
आभाष कराते हो
कभी सुख में
कभी दुःख में
याद आते हो ।
पर दुख में
सब तुझे भूलतें हैं
दुःख दे कर अपने अस्तित्व का
अहसास कराते हो।
कभी तो करो पुरी मेरी मनोकामना
कभी तो दरस दिखाओ,
कभी तो अपनी झलक दिखाओ
खो जाऊँ तुझमे
ऐसी ज्योति का आभास करा दो ।
तब ,
भूख प्यास की आस ख़तम हो
दुनिया में जीने की आस ख़तम हो ।
हर पल
हर क्षण
तेरी याद के सहारे
अपने को संभालता रंहूँ ।
जीवन मृत्यु के
इस जंगल से
इक बार दरस दिखा कर
मुक्त कर जाओ ।।

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