केवल सद्गुरु का ध्यान और नाम की कमाई ही इस कलयुग में जीव का उद्धार करा सकती है।
ईश्वर और संत सद्गुरु हमारे अंग संग है। हमेशा वे हमारा ख्याल रखतें है और सम्भल भी करतें है।
दुःख का आना जाना लगा ही रहेगा पर सैम और स्थिर चित्त व्यक्ति सदा ही सुखी रहता है।
समस्त जीव के साथ प्यार सहिष्णुता दया करुणा क्षमा सहज
प्रेम पूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
अपने को मालिक के हवाले सौप दो।
जो ज्यादा मान सम्मान चाहतें है वे बड़ी जल्दी ही अपमानित हो जातें है। उनका अहं गुब्बारे की तरह फुला होता है और हर समय उसमें पिन चुभने का डर लगा रहता है।
चाह गई चिंता गई मनुवा बेपरवाह
जिस को कछु न चाहिए वो ही शाहंशाह।
ईश्वर को प्राप्ति के लिए आपको एकांत और शांत रहना जरुरी है।
समय थोड़ा है मंजिल दूर है, जो करना है सो आज और अभी करना है।
जीओं जरुरत के मुताबिक और हमेशा खुश रहो।
बर्तमान में जीओ और अच्छे से जीओ क्योंकि अगला क्षण तुम्हारा नहीं है।
मृत्यु अवश्यम्भावी है जो सबसे बड़ा सच है इसलिए मृत्यु से डरो और अच्छे कर्म किया करो।
स्व को जो ढूंढा तो मुझे स्वामी मिल गया।
जो जैसा है वैसा ही निहारो, उसमे अपने मन से, विवेक से, बुद्धि से कुछ भी मत जोड़ो।
कष्ट पकड़े रहने में है, छोड़ने की आदत डालो फिर सुख ही सुख है।
मुर्ख लोग इस नश्वर संसार से लगाव रखतें है, और कुछ भी खोने पर उन्हें कष्ट होता है और रोतें भी है पर ज्ञानी जान तो देख देख मंद मन्द मुस्कुराते रहतें है क्योंकि जानतें है क्या लाया था जो खो दिया। तेरा ही था तुझे मिल गया। फिर क्यों रोना।
सच्चा मार्ग वही है जो जीते जी मुक्ति दिला दे क्योंकि मरने के बाद की मुक्ति का बात एक छलावा है।
जीते जी मरने की विधि सीखिये और भाव जाल पार कर जाइए।
ईश्वर और संत सद्गुरु हमारे अंग संग है। हमेशा वे हमारा ख्याल रखतें है और सम्भल भी करतें है।
दुःख का आना जाना लगा ही रहेगा पर सैम और स्थिर चित्त व्यक्ति सदा ही सुखी रहता है।
समस्त जीव के साथ प्यार सहिष्णुता दया करुणा क्षमा सहज
प्रेम पूर्ण व्यवहार करना चाहिए।
अपने को मालिक के हवाले सौप दो।
जो ज्यादा मान सम्मान चाहतें है वे बड़ी जल्दी ही अपमानित हो जातें है। उनका अहं गुब्बारे की तरह फुला होता है और हर समय उसमें पिन चुभने का डर लगा रहता है।
चाह गई चिंता गई मनुवा बेपरवाह
जिस को कछु न चाहिए वो ही शाहंशाह।
ईश्वर को प्राप्ति के लिए आपको एकांत और शांत रहना जरुरी है।
समय थोड़ा है मंजिल दूर है, जो करना है सो आज और अभी करना है।
जीओं जरुरत के मुताबिक और हमेशा खुश रहो।
बर्तमान में जीओ और अच्छे से जीओ क्योंकि अगला क्षण तुम्हारा नहीं है।
मृत्यु अवश्यम्भावी है जो सबसे बड़ा सच है इसलिए मृत्यु से डरो और अच्छे कर्म किया करो।
स्व को जो ढूंढा तो मुझे स्वामी मिल गया।
जो जैसा है वैसा ही निहारो, उसमे अपने मन से, विवेक से, बुद्धि से कुछ भी मत जोड़ो।
कष्ट पकड़े रहने में है, छोड़ने की आदत डालो फिर सुख ही सुख है।
मुर्ख लोग इस नश्वर संसार से लगाव रखतें है, और कुछ भी खोने पर उन्हें कष्ट होता है और रोतें भी है पर ज्ञानी जान तो देख देख मंद मन्द मुस्कुराते रहतें है क्योंकि जानतें है क्या लाया था जो खो दिया। तेरा ही था तुझे मिल गया। फिर क्यों रोना।
सच्चा मार्ग वही है जो जीते जी मुक्ति दिला दे क्योंकि मरने के बाद की मुक्ति का बात एक छलावा है।
जीते जी मरने की विधि सीखिये और भाव जाल पार कर जाइए।

No comments:
Post a Comment