Corporate Agriculture is the best for India
भारत जैसे विशाल देश में जहाँ 80 % लोग गाँव में बसतें हैं और भारत कृषि प्रधान देश है। ऐसे में स्वभाविक है ज्यादा से ज्यादा लोग गाँव में ही बेरोजगार होंगे। फिर जैसे जैसे आवादी बढ़ती जा रही है वैसे वैसे अनाजो की भी उत्पादन बढाना पड़ेगा।
अगर हमारी सरकार कॉर्पोरेट खेती करने को प्रश्रय दे , जिसमे सभी आधुनिक तरीके से खेती हो। किसी अच्छी कंपनी के द्वारा कराया जाये जिसमे गांव के मजदुर व् किसान भाइयो की सहभागिता हो और उनके श्रम के एवज में उनको मासिक वेतन निर्धारित किया जाये तथा जमींन के एवज में उन्हें अन्न मुहैया किया जाय।
अभी हमारे देश में दलहन तथा तेलहन की जो कमी हो गई है उससे ही निजात मिल सकती है।
ऐसा करने से गाँव के युवक, मजदुर एवं किसान भाई को रोजगार भी मिलेगा साथ ही भारत में बिभिन्न प्रकार के अनाज के उत्पादन में भी मील का पत्थर साबित होगा।
यह गाँव को आदर्श गाँव बनाने में भी सहयोग करेगा साथ ही बेरोजगारी एवम् अनाज उत्पादन में भी।
भारत जैसे विशाल देश में जहाँ 80 % लोग गाँव में बसतें हैं और भारत कृषि प्रधान देश है। ऐसे में स्वभाविक है ज्यादा से ज्यादा लोग गाँव में ही बेरोजगार होंगे। फिर जैसे जैसे आवादी बढ़ती जा रही है वैसे वैसे अनाजो की भी उत्पादन बढाना पड़ेगा।
अगर हमारी सरकार कॉर्पोरेट खेती करने को प्रश्रय दे , जिसमे सभी आधुनिक तरीके से खेती हो। किसी अच्छी कंपनी के द्वारा कराया जाये जिसमे गांव के मजदुर व् किसान भाइयो की सहभागिता हो और उनके श्रम के एवज में उनको मासिक वेतन निर्धारित किया जाये तथा जमींन के एवज में उन्हें अन्न मुहैया किया जाय।
अभी हमारे देश में दलहन तथा तेलहन की जो कमी हो गई है उससे ही निजात मिल सकती है।
ऐसा करने से गाँव के युवक, मजदुर एवं किसान भाई को रोजगार भी मिलेगा साथ ही भारत में बिभिन्न प्रकार के अनाज के उत्पादन में भी मील का पत्थर साबित होगा।
यह गाँव को आदर्श गाँव बनाने में भी सहयोग करेगा साथ ही बेरोजगारी एवम् अनाज उत्पादन में भी।

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