Sunday, April 26, 2020

अदालतनामा...

अदालतनामा...
ये है अक्लमंदी
इसे कहतें है आरक्षण
जो जिस कैटेगोरी का है
उसे वैसी ही सजा।

भारत मे न्यायाधीश को स्व विवेक पर निर्णय लेने का काम है,
फिर
अपने पराये तो देखने पड़तें हैं ना
फिर
गरीब का न्याय अदालत तक जाएगा नही
उसे तो जनता ही लप्पड़ थप्पड़ मार कर न्याय दे देती है, व पुलिसकर्मियों द्वारा ही ऊपर पहुंचा दिया जाता है टॉर्चर का कर फिर उदाहरण मॉब लिंचिंग का जहां कानून व अदालत बेकार व
यादव का न्याय अलग
कोईरी कुर्मी का अलग
SC/ST का अलग
फिर सुवर्ण को तो पूरी छूट मिलनी चाहिए ही क्योंकि वो तो न्याय कर्ता हीं हैं। फिर अपने को तो बचाना ही चाहिए।
ये भी तो न्याय संगत ही है ना..???

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