ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे,
फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ हिसाब माँगने लगे।
हसरतें जितनी भी थीं सब आह बनके उड़ गए,
ख़्वाब जितने भी थे सब अश्के-रवाँ मे खो गए।
जब टूटने लगे होंसले, तो बस ये याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल, तख्तो-ताज नहीं होते,
ढूंड लेना अंधेरों में खोई मंजिल अपनी,
जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते।
जो मजबूरियों का रोना, रोया नहीं करते,
जो हिम्मत व ईमानदारी से मेहनत करते
हारी हुई बाजी भी पल में पलट देतें हैं
उनके ही सितारे हर बक्त बुलंद होते हैं।
डर मुझे भी लगा था फासला देख कर पर,
मैं हिम्मत से बढ़ता गया रास्ता देख कर,
खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई
मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर।।
फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ हिसाब माँगने लगे।
हसरतें जितनी भी थीं सब आह बनके उड़ गए,
ख़्वाब जितने भी थे सब अश्के-रवाँ मे खो गए।
जब टूटने लगे होंसले, तो बस ये याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल, तख्तो-ताज नहीं होते,
ढूंड लेना अंधेरों में खोई मंजिल अपनी,
जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते।
जो मजबूरियों का रोना, रोया नहीं करते,
जो हिम्मत व ईमानदारी से मेहनत करते
हारी हुई बाजी भी पल में पलट देतें हैं
उनके ही सितारे हर बक्त बुलंद होते हैं।
डर मुझे भी लगा था फासला देख कर पर,
मैं हिम्मत से बढ़ता गया रास्ता देख कर,
खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई
मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर।।

No comments:
Post a Comment